Tuesday, June 21, 2022

माँ

एक उम्र निकल गयी, माँ से दूर रहते-रहते 
जिंदगी जीने की दौड़ ने, भगवान से दूर कर दिया

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घर, जो उसने चुपचाप सँवारा — एक कविता, उसके नाम

                                घर बदला, दीवारें नई हैं, पर उसकी थकान वही पुरानी सी है, सुबह की चाय अब ठंडी होती है, बच्चों की हँसी मे...