Monday, May 6, 2019

देहरादून के वो दिन

हुई एक बार ऐसी बात
जब मेरे दोस्त ने अपने दोस्त
और उसकी दोस्त के साथ
हम दोस्तों के सामने रखी,
हमारे ही दोस्त के बर्थडे की बात

सोचा चलो राजी हो जाये
क्यों न दोस्त का बर्थडे
दुबारा मनाये....
झट से हुए हम राजी
सोचा मार ही लेंगे बाजी

बस पैसे का हुआ था रोड़ा
सोचा, मिलाएंगे थोड़ा थोड़ा
करके दिन समय की बात
घर को चल दिए हम सब साथ

सुबह हुई तो जेब को झाँका
उसके बाद अपने आप को TAANKA,
जेब में थे कुल तीस रुपए
चल दिए हम भी डरे डरे

समय हुआ जो , मिले तो उनसे
बोले अपने दिल का हम हाल
दोस्त बोले मत कर चिंता
हम भी है सारे कंगाल

मिल कर हम सब रेस्टोरेंट भागे
जहां वेटर ने कर दिया मेनू आगे
हमारे तो होश उड़ गए
सबसे सस्ती चीज के भी दाम बढ़ गए

हिम्मत करके कॉफ़ी आर्डर की
पीनी किसने थी वो तो गले
से ही निकल गयी

फिर दोस्त ने सोचा
कॉफ़ी में नहीं बनेगी बात
कुछ खाने को भी
होना चाहिए साथ

देखा मेनू में सूप है पड़ा
जो है दाम में सबसे खरा
करके वेटर से बात
लगाये हमने 4 कटोरे
इन दी सात

दोस्त हमारा गा रहा था गाने
और हम लगे थे गिनने में आने
जैसे तैसे पूरा किया हिसाब
और हम बोल उठे जनाब

की बर्थडे तो ज़रूर मनाएंगे
पर गलती से भी
ऐसे किसी रेस्टोरेंट में नहीं जायेंगे

DEDICATED TO ADULTHOOD MEMORIES WITH FRIENDS OF DUN

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